जनता परेशान: सरकारी मोबाइल फोन पर नहीं होती बात

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राहुल पाण्डेय। नई दिल्ली
“आप को परेशानी हो तो संपर्क करें, डीएम का मोबाइल नंबर, एसएसपी का मोबाइल नंबर, आईजी का मोबाइल, एसएचओ या एसओ का मोबाइल नंबर, नगर विकास अधिकारी का मोबाइल, नंबर मुख्य विकास अधिकारी का नंबर, यह है”। जी हां, कुछ इस तरह मोबाइल नंबरों की सूचनाएं प्रशासनिक कार्यालयों और पुलिस विभाग के बाहर लगी होती हैं। परेशान जनता जब इन मोबाइल नंबरों पर कॉल करती है तो हैरान रह जाती है कि लाख कोशिशों के बाद भी यह नौकरशाह फोन नहीं उठाते। यह मोबाइल नंबर की सूचनाएं केवल सूचना मात्र ही रह जाती हैं। न तो जनता को इससे कोई लाभ होता है और न ही उनकी परेशानी का हल निकलता है। यह परेशानी एक प्रदेश या शहर की नहीं कमोबेश पूरे देश की है। वह चाहे नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ, हरियाणा या पंजाब कोई भी जगह हो। यहां के आलाधिकारी अपने क्षेत्र की जनता के प्रति असंवेदनशील हैं।
कहते हैं लोग
नई दिल्ली की नीतू बताती है कि परेशानी पर उन्होंने संबंधित थाने में फोन किया लेकिर कॉल नहीं उठा। आखिर में उन्होंने 100 नंबर पर फोन किया। चंडीगढ के सेक्टर 44 की रहने वाले हरदीप कहते हैं कि यहां के डीसी हो या एसएसपी आप बात करने को तरस जाएंगे। मोबाइल उठाने तो दूर की बात है। झांसी के सिविल लाइन निवासी दिवाकर कहते हैं कि प्रशासनिक अफसर केवल नेताओं और अपने खास लोगों का ही फोन उठाते हैं। और यह भी है कि सरकारी मोबाइल नंबरों पर आने वाले काल्स पर वह ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। वह अपनों को प्राइवेट नंबर बांटे होते हैं। पंजाब के प्रभप्रीत बताते हैं कि पुलिस के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन मिलाने पर अगर वह उठा लें तो भाग्य है। आखिर इन्हें यह सरकारी मोबाइल नंबर दिया ही क्यों जाता है। गुडगांव के विशाल बताते हैं कि सरकारी मोबाइल नंबर या तो दिया न जाए और दिया जाए तो उसपर अधिकारी बात करे।
क्या हैं बहाने
अगर आप अफसरों से पूछे की आप का सरकारी नंबर क्यों नहीं उठता तो उनके पास कई बहाने हैं। मीटिंग में थे, दूर रखा था, आदि बहाने होते हैं।
आखिर क्या है सीयूजी
यह मोबाइल नंबर सरकार उन अधिकारियों को देती है जो जनता से सीधे जुडाव रखते है। परेशानी में या अन्य जानकारी देने के लिए इन मोबाइल नंबरों को अलग अलग स्थानों पर लिखा जाता है। इस नबंर से आम लोग अपनी समस्या अपने क्षेत्र के संबंधित विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं।
क्या कहते हैं नेता
उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रवक्ता मनोज मिश्र कहते हैं कि अफसरों का जनता से बात न करना बहुत ही निंदनीय है। सरकारी मोबाइल नंबर का काम ही है कि लोग अपनी समस्या अधिकारी तक पहुंचाएं। वहीं सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए कि केवल सरकारी मोबाइल सिम देने से ही काम पूरा नहीं हो जाता। अफसर इस फोन को कितना इस्तेमाल करता है, कितनी समस्याओं का हल किया गया अब तक। यह सब ध्यान देना सरकार का काम है।

हरियाणा के आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजीव गोदरा कहते हैं कि आम आदमी अपनी शिकायत आलाधिकारी तक कैसे पहुंचाएं। सैकडों किलोमीटर दूर अगर कोई अपनी समस्या मोबाइल के जरिए बताना चाहते है तो उसे निराशा ही हाथ लगती है। सरकार को चाहिए कि वह जाने की सरकारी फोन पर कितनी शिकायते हैं आती हैं। अफसर जनता के कितने संपर्क में है।

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