किन्नरों से जुड़े सीक्रेट फैक्ट्स , कई अनजाने पहलू

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भारत में किन्नरों का इतिहास चार हजार साल से भी पुराना है, फिर भी आज तक उन्हें सोसाइटी में बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाया। उनकी जिंदगी के ऐसे कई अनजाने पहलू हैं, जिनकी जानकारी काफी कम लोगों को होगी है।

किन्नरों से जुड़े ऐसे ही  सीक्रेट फैक्ट्स 

एस्ट्रोलॉजी के मुताबिक ऐसे पैदा होते हैं किन्नर
इस बात का कोई साइंटिफिक प्रमाण नहीं मिल पाया है कि गर्भ में पल रहा बच्चा किन्नर कैसे बन जाता है? इस सवाल का जवाब एस्ट्रोलॉजी में मौजूद है। उसके मुताबिक, अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का गर्भ सीमेन की ज्यादा मात्रा के कारण ठहरा है, तो लड़के का जन्म होता है। अगर खून की मात्रा ज्यादा है, तो बेटी का जन्म होता है। जब सीमेन और खून दोनों बराबर मात्र में होते हैं, तब पैदा होते हैं किन्नर।

साल में सिर्फ एक दिन के लिए होती है शादी
किन्नरों की हर साल एक बार शादी होती है। उनका विवाह उनके भगवान इरावन से होती है। हालांकि, ये शादी सिर्फ एक दिन के लिए ही मानी जाती है। विवाह के अगले दिन इरवन देव की मूर्ति को शहर में घुमाया जाता है और फिर उसे तोड़ दिया जाता है। इसके साथ ही किन्नर अपना श्रृंगार उतारकर एक विधवा की तरह विलाप करने लगते है और सफेद कपड़े पहन लेते हैं।

मौत के बाद की रस्में होती हैं सीक्रेट
किन्नरों की मौत के बाद होने वाली रस्में काफी सीक्रेट होती हैं। इन्हें ज्यादातर रात को गोपनीय तरीके से पूरा किया जाता है, ताकि कोई गैर किन्नर अंतिम संस्कार होते हुए न देख सके।

मुगलों ने दिया था ये सम्मान
मुगल साम्राज्य में किन्नरों को महिलाओं के हरम की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ को तो मुगल सेना का जनरल भी बनाया गया था। मलिक काफूर, जो की एक किन्नर थे, ने अलाउद्दीन खिलजी को हराने में काफी अहम रोल निभाया था।

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साल में एक बार इस जगह जुटते हैं सारे किन्नर
किन्नरों का एनुअल फेस्टिवल साल में एक बार मद्रास से 200 मील दूर कूवगम गांव में होता है, जहां पूरे भारत के किन्नर जमा होते हैं।

हर किन्नर का होता है एक गुरु
हर किन्नर के कोई एक गुरु होते हैं, जिन्हें अपने शिष्य के बारे में सारी जानकारी होती है। उन्हें यहां तक पता होता है कि उस शिष्य की मौत कब होगी। लेकिन ऐसा तब ही हो पाता है, जब गुरु का जन्म ही किन्नर की तरह हुआ हो। ना कि उसने खास प्रक्रिया के बाद किन्नर समाज में प्रवेश किया हो।
किन्नरों की ज्यादातर परम्पराएं हिन्दू धर्म के मुताबिक निभाई जाती है, लेकिन आपको बता दें कि अधिकांश किन्नर गुरु मुस्लिम होते हैं।

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किन्नरों को माना जाता है ब्रम्हाजी की परछाई

एक मान्यता के अनुसार, किन्नर भगवान् ब्रम्हा की परछाई होते हैं। उनकी छाया से ही किन्नरों की उत्पत्ति हुई है। वहीं, दूसरी मान्यता यह है कि अरिष्टा और कश्यप ऋषि से किन्नरों की उत्पति हुई है।

अगले जन्म में नहीं बनना चाहते किन्नर
किन्नर बरुचा माता की पूजा कर उनसे माफी मांगते है कि अगले जन्म में उन्हें किन्नर की तरह जन्म ना लेना पड़े।

 

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